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कंधे पर बच्चे की लाश लेकर भटकता रहा मज़दूर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य गायों के लिए एंबुलेंस सेवा की शुरुआत कर रहे थे. उसी समय वहां से क़रीब तीन सौ किलोमीटर दूर इटावा में एंबुलेंस न मिलने के कारण एक व्यक्ति अपने पंद्रह साल के बच्चे के शव को कंधे पर लादकर जा रहा था.

घटना सोमवार की है जब उदयवीर सिंह नामक एक व्यक्ति अपने बीमार बेटे पुष्पेंद्र को गंभीर हालत में उपचार के लिए सरकारी अस्पताल में लाया था. इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात डॉक्टर ने बताया कि बच्चे की मौत हो चुकी और अब उसे इलाज की ज़रूरत नहीं है.

बच्चे के पिता उदयवीर ने वहां मौजूद कुछ पत्रकारों को बताया, “सिर्फ़ पांच मिनट में डॉक्टर ने देखकर कहा कि बच्चा मर चुका है और इसे ले जाओ. अस्पताल वालों ने न तो कोई साधन दिया और न ही कुछ बताया. फिर मैं उसे अपने कंधे पर लेकर अस्पताल से घर लेकर गया क्योंकि मेरे पास गाड़ी करने के लिए पैसे भी नहीं थे.”

इस बारे में जब इटावा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर राजीव यादव से बात की गई तो उनका कहना था, “दरअसल, उसी समय सड़क हादसे में घायल कई लोग अस्पताल में आ गए और शायद यही वजह हो कि मृत बच्चे को शव वाहन न मिल सका हो, लेकिन ये बेहद शर्मनाक है.”

उन्होंने कहा, “ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है.”

हालांकि डॉक्टर राजीव यादव का ये भी कहना था कि इस बात की भी जानकारी ली जाएगी कि उदयवीर ने एंबुलेंस की मांग की थी या नहीं.

स्थानीय पत्रकार के मुताबिक जिस वक़्त उदयवीर रोते हुए अपने मृत बच्चे को अस्पताल से लेकर बाहर जा रहा था उसी वक़्त किसी ने उसे कैमरे पर क़ैद कर लिया. फिर इस तस्वीर के सोशल मीडिया में आने के बाद लोगों को इसके बारे में पता चला.

बताते हैं, “वैसे तो इटावा के सरकारी अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं हैं, मरीजों और मृतकों के शव के लिए विशेष वाहन की सुविधा के भी बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन इस घटना ने इन सारे दावों की पोल खोल दी है.”

बहरहाल, मामले की जांच की जा रही है और ख़ुद मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा है कि दोषी पाए जाने पर डॉक्टर के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन मज़दूर दिवस के दिन एक मज़दूर की इस बेबसी ने न सिर्फ़ व्यवस्था पर बल्कि मानवता पर भी सवाल खड़े किए हैं.

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